समकालीन नेपाली साहित्य क्षेत्रका सक्रिय साहित्य सर्जक हेटौँडा उपमहानगरपालिका-४ निवासी किशन पौडेल कविता, कथा, गजल, मुक्तक, हाइकु आदि लेखनमा कलम चलाउनुहुन्छ । लघुकथा चौतारी मकवानपुरका संयोजक पौडेलको हालसालै लघुकथा सङ्ग्रह ‘अंतर्दृष्टि’ प्रकाशन भएको छ । भारतबाट प्रकाशित यस पुस्तक नेपालीमा समेत अनुवाद भइसकेको छ भने बङ्गाली र आसामी भाषामा समेत प्रकाशन भएर देशबाहिरका पाठकहरूले अध्ययन गरिरहनु भएको छ । यस सङ्ग्रहभित्र ३८ लघुकथाहरु समावेश छन् जसमा राजनीति, धर्म, मानवीय आकाङक्षालगायतका विषयवस्तुहरूको प्रचुरता पाइन्छ । हालसालै रामहरी-देबु सम्मान २०८० ले सम्मानित उहाँका हिन्दी भाषामा लिखित लघुकथा सङ्ग्रह ‘अंतर्दृष्टि’ मा सङ्ग्रहित केही लघुकथाहरू प्रस्तुत गरिएको छ ।

३ लघुकथाहरू

आशीर्वाद

उसे ऊपर पहुँचना था। उसने एक आशाजनक चाकरी की सीढ़ी देखी। अपना सिर झुका कर बोला-
‘प्रभु! मेरे लिए अवसर का द्वार खोल दीजिए।’
‘ठीक है ऊपर चढ़ लो ।´

उसे मालिक का आशीर्वाद मिल गया । वह अपने विवेक पर लगाम लगाकर एक सीढी ऊपर चढ़ गया।
ऊपर उसने मीठे अंगूरों का एक गुच्छा देखा और लालच का लंबा हाथ बढ़ाकर कहा-
‘जनाब मुझे वहाँ तक पहुँचना है!’
‘पकड़ लो हाथ।’
उसने चापलूसी की रस्सी पकड़ी और ऊपर चढ़ गया।
ऊपर जाकर वह जीवन के रंग-बिरंगे सपने देखने लगा। ऊँची उड़ान भरने की चाहत में अपने महत्वाकांक्षी पंखों को फड़फड़ाते हुए बोला – ‘महोदय! मुझे शिखर पर पहुँचना है, कृपा करें।’
-‘बेशक!’
उसे आशीर्वाद मिला।
वह अपनी निष्ठा को रौंदते हुए शिखर पर पहुँच गया।

वहाँ उस जैसे अवसरवादी अपनी नैतिकता को दाँव पर लगा रहे थे।
उसने पूछा – मालिक ‘अब मैं क्या करूँ?’
-‘दे दो बलिदान।’
उसने अपनी नैतिकता का बलिदान किया और अवसर की खिड़की से अन्दर कदम रखकर ईमान का दरवाजा बन्द कर लिया।
ऊँचे शीशमहल के भीतर धीरे-धीरे उतरते हुए उसने शीशे में अपना चेहरा देखा। स्वाभिमान का सिर नहीं था।
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मृत्यु का भय

डॉक्टर ने ब्लड-रिपोर्ट देखने के बाद उसके चेहरे को गंभीरता से निहारा और कहा-
‘तुम्हें ब्लड कैंसर है। यहाँ इलाज संभव नहीं है। जल्द से जल्द किसी अच्छे अस्पताल में जाकर अपना इलाज करवाओ।’

डॉक्टर के इस सुझाव और खून की रिपोर्ट के बारे में जानकार वह चिंता में पड़ गया। उसके होंठ, मुँह और तालू अचानक सूख गए। हाथ-पैर धीरे-धीरे सुन्न पड़ने लगे। यह उसके लिए अकल्पनीय था।

दो-चार दिन पहले शरीर में हल्का दर्द महसूस होने पर वह फुल बॉडी चेकअप कराने के इरादे से पास के एक निजी अस्पताल में गया था। उसे उम्मीद नहीं थी कि ऐसी अकल्पनीय रिपोर्ट आएगी।

वह अपनी रिपोर्ट लेकर सोच में डूबा हुआ अस्पताल से निकलकर सड़क पर आगे बढ़ने लगा। सुबह जिस जोश और उत्साह के साथ घर से निकला था, अब वह नहीं था। उसके हाथ-पैर थके हुए थे।

घर के नन्हे-मुन्नों को याद कर उसका मन उदास हो उठा। मरने के बाद उनकी देखभाल कौन करेगा? पत्नी घर कैसे चलाएगी? शादी हुए अभी पाँच साल ही हुए हैं। इसी तरह की निराशा भरी बातें सोचता हुआ वह किसी तरह घर तक पहुँचा।

बच्चे एक-दूसरे के गले लगकर खुशी से झूम उठे, ‘पापा आ गए… पापा आ गए।’
‘क्या हुआ आपको?’ पत्नी ने आश्चर्य से पूछा परंतु वह कुछ नहीं बोल पाया और जाकर कुर्सी पर चुपचाप बैठ गया। उसे अपनी आँखों के सामने साक्षात मृत्यु नजर आ रही थी और भय के बादल उसके आसपास मँडराने लगे। अपनी देह में उसे असहनीय पीड़ा महसूस हो रही थी।

तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी। उसे उठाने की हिम्मत भी नहीं कर पा रहा था । दो-तीन बार घंटी बजने पर आखिरकार उसने मोबाइल उठाया ।

‘नमस्ते! मैं लाइफ केयर हस्पिटल से बोल रहा हूँ। क्षमा करें, आप जो रिपोर्ट ले गए थे वह भूलवश बदल गई थी।`
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रहस्य के परदे

देखते-देखते ही सोमनाथ ने महँगी गाड़ी खरीद ली और शहर में आधुनिक दो मंजिला मकान भी बनवा लिया था।
मैं उसका रहन-सहन देखकर आश्चर्यचकित था। उसकी शानोशौकत बिल्कुल अलग हो चुकी थी।
कुछ साल पहले तक हमदोनों एक ही मकान में डेरा लेकर साथ ही रहा करते थे। उनकी और मेरी नौकरी में वेतन भी एक ही जैसा था। सस्ते कपड़े और रूखा-सूखा खाकर भी हम सन्तुष्ट थे।
देखते-देखते वह समृद्धि के शिखर पर पहुँच गया। तरक्की लेकर अब एक बड़ा अधिकारी भी बन चुका था।
तनख्वाह मिलती है पर बचत नहीं हो पाता है। घर-दफ्तर का जीवन बड़ी कठिनाई से गुजर रहा है।
दोस्त सोमनाथ इतनी अमीरी के शिखर तक कैसे पहुँचा होगा? उसके असाधारण जीवन को देखकर मुझे ताज्जुब हो रहा था।
एक दिन उसने मुझे एक महँगे रेस्टोरेंट में डिनर पर आमंत्रित किया। उसकी वेशभूषा, हावभाव अजीब से लग रहे थे। मेंने अपनी मन की बात और जिज्ञासा उसके सामने रखी।
‘दोस्त, मुझे भी इस तरक्की का रहस्य बताओ ताकि मेरी हालत भी सुधर जाए।’
वह मेरे कान के पास आया और गर्व से बोला-
‘ये सभी उपलब्धियाँ मैंने अपने तीन अभिन्न मित्रों की मदद से हासिल की है।’
मेंने उत्सुकता से मित्रों का नाम पूछा। वह कह रहा था-
‘चाकरी, चापलूसी और भ्रष्टाचार।’

कहर गजल सङ्ग्रह, खुसी लघुकथा सङ्ग्रह, विश्व लघुकथा सङ्ग्रह (हिन्दी र बङ्गाली) लेखिसक्नु भएका उहाँको मुक्तक सङ्ग्रह अन्तरध्वनी प्रकाशोन्मुख रहेको छ । उहाँका संयुक्त गजल सङ्ग्रह हैसियत र संयुक्त कविता सङ्ग्रह अभिव्यञ्जना प्रकाशन भएका छन् । साहित्य सङ्गम, मातृभूमि साहित्य समाजलगायत संस्थामा आबद्ध भइसक्नु भएका उहाँका विभिन्न पत्रपत्रिकामा प्रशस्त फूटकर रचनाहरू प्रकाशित छन् ।